Sunday, March 1, 2020

हिन्दू पंचांग

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                 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
⛅ दिनांक 02 मार्च 2020
⛅ दिन - सोमवार
⛅ विक्रम संवत - 2076
⛅ शक संवत - 1941
⛅ अयन - उत्तरायण
⛅ ऋतु - वसंत
⛅ मास - फाल्गुन
⛅ पक्ष - शुक्ल
⛅ तिथि - सप्तमी दोपहर 12:52 तक तत्पश्चात अष्टमी
⛅ नक्षत्र - कृत्तिका सुबह 08:55 तक तत्पश्चात रोहिणी
⛅ योग - वैधृति दोपहर 12:45 तक तत्पश्चात विष्कम्भ
⛅ राहुकाल - सुबह 08:18 से सुबह 09:45 तक
⛅ सूर्योदय - 07:00
⛅ सूर्यास्त - 18:41
⛅ दिशाशूल - पूर्व दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - होलाष्टक प्रारंभ

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 💥 विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है था शरीर का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

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🌷 कालसर्प योग से मुक्ति पाने 🌷

🐍 कालसर्प दोष बहुत भयंकर माना जाता है | और ये करो... ये करो... इतना खर्चा करो.....इतना जप करो.... कई लोग इनको ठग लेते हैं | फिर भी कालसर्प योग से उनका पीछा नहीं छूटता | लेकिन ज्योतिष के अनुसार उनका कालसर्प योग नहीं रहता जिनके ऊपर केसुड़े (पलाश ) के रंग - होली के रंग  का फुवारा लग जाता है | फिर कालसर्प योग से मुक्ति हो गई | कालसर्प योग के भय से पैसा खर्चना नहीं है और अपने को ग्रह दोष है, कालसर्प है ऐसा मानकर डरना नहीं अपने को दुखी करना नहीं है |

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🌷 ब्रम्हवृक्ष पलाश 🌷

🍂 पलाश को हिंदी में ढ़ाक, टेसू, बंगाली में पलाश, मराठी में पळस, गुजराती में केसुडा कहते है | इसके पत्त्तों से बनी पत्तलों पर भोजन करने से चाँदी – पात्र में किये भोजन तुल्य लाभ मिलते हैं  |

🙏🏻 ‘लिंग पुराण’ में आता है कि पलाश की समिधा से ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र द्वारा १० हजार आहुतियाँ दें तो सभी रोगों का शमन होता है |

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🥀 पलाश के फूल : प्रमेह (मुत्रसंबंधी विकारों) में: पलाश-पुष्प का काढ़ा (५० मि.ली.) मिश्री मिलाकर पिलायें |

➡ रतौंधी की प्रारम्भिक अवस्था में : फूलों का रस आँखों में डालने से लाभ होता है | आँखे आने पर (Conjunctivitis) फूलों के रस में शुद्ध शहद मिलाकर आँखों में आँजे |

  💪 वीर्यवान बालक की प्राप्ति : एक पलाश-पुष्प पीसकर, उसे दूध में मिला के गर्भवती माता को रोज पिलाने से बल-वीर्यवान संतान की प्राप्ति होती है |

🍂 पलाश के बीज : ३ से ६ ग्राम बीज-चूर्ण सुबह दूध के साथ तीन दिन तक दें | चौथे दिन सुबह १० से १५ मि.ली. अरंडी का तेल गर्म दूध में मिलाकर पिलाने से कृमि निकल जायेंगे |

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🍂 पत्ते : पलाश व बेल के सूखे पत्ते, गाय का घी व मिश्री समभाग मिला के धूप करने से बुद्धि की शुद्धि व वृद्धि होती है |

➡  बवासीर में : पलाश के पत्तों की सब्जी घी व तेल में बनाकर दही के साथ खायें |

🥀 छाल : नाक, मल-मूत्र मार्ग या योनि द्वारा रक्तस्त्राव होता हो तो छाल का काढ़ा (५० मि.ली.) बनाकर ठंडा होने पर मिश्री मिला के पिलायें |

🍂 पलाश का गोंद : पलाश का १ से ३ ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध या आँवला रस के साथ लेने से बल-वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं | यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है |

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